जमशेदपुर के श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर में पाली जाएंगी मिनियेचर Nano गायें, गोसेवा क्षेत्र बनाने की तैयारी


जमशेदपुर। शहर के केबुल टाउन स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में जल्द ही गोसेवा की एक अनोखी पहल शुरू होने जा रही है। मंदिर परिसर में एक विशेष गोसेवा क्षेत्र बनाया जाएगा, जहां मिनिएचर काउ यानी Nano काउ का पालन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य गोसेवा को बढ़ावा देना और लोगों को दुर्लभ नस्ल की गायों के बारे में जानकारी देना है। यह जानकारी जमशेदपुर पश्चिम के विधायक Saryu Roy ने दी।

विधायक सरयू राय ने बताया कि यह Nano काउ आंध्र प्रदेश से लाई गई हैं। मंदिर के समीप रहने वाले एक सज्जन ने इन गायों को मंगवाया है और प्रेमवश उन्हें मंदिर परिसर में लोगों को दिखाने के लिए लेकर आए थे। जब मंदिर समिति और स्थानीय लोगों ने इन गायों को देखा तो सभी को यह पहल काफी अच्छी लगी। इसके बाद मंदिर परिसर में ही Nano काउ पालन करने का निर्णय लिया गया।

सरयू राय ने कहा कि आमतौर पर इन Nano काउ की ऊंचाई लगभग डेढ़ फुट होती है। आकार में छोटी होने के बावजूद ये Nano गायें नियमित रूप से करीब एक लीटर दूध देती हैं। इनका स्वभाव शांत और पालन-पोषण भी अपेक्षाकृत आसान होता है। यही कारण है कि कई स्थानों पर इन्हें धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ पाला जाता है।

उन्होंने बताया कि देश में इस नस्ल की Nano गायें मुख्य रूप से Punganur क्षेत्र और Vechoor में पायी जाती हैं। यह भारत की दुर्लभ और पारंपरिक नस्लों में से एक मानी जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन गायों का दूध भी पोषण से भरपूर होता है और कई लोग इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानते हैं।

मंदिर परिसर में बनने वाले गोसेवा क्षेत्र में इन Nano काउ के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। यहां उनके रहने, खाने और स्वास्थ्य की देखभाल के लिए उचित प्रबंध किए जाएंगे। साथ ही मंदिर आने वाले श्रद्धालु भी इन गायों को देख सकेंगे और गोसेवा में भाग ले सकेंगे। इससे मंदिर परिसर का धार्मिक वातावरण और भी समृद्ध होगा।


मंदिर समिति के सदस्यों का कहना है कि यह पहल सिर्फ गोपालन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि लोगों में पारंपरिक भारतीय पशुपालन और गोसंरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी। मंदिर में आने वाले बच्चे और युवा भी इन Nano गायों को देखकर भारतीय नस्लों के महत्व को समझ सकेंगे।

स्थानीय लोगों में भी इस पहल को लेकर काफी उत्साह है। उनका कहना है कि मंदिर परिसर में Nano काउ का पालन शुरू होने से यह स्थान एक आकर्षण का केंद्र बन सकता है। कई श्रद्धालु और पर्यटक भी इन छोटी Nano गायों को देखने के लिए यहां आ सकते हैं।

धार्मिक दृष्टि से भी Nano गाय को भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान दिया गया है। ऐसे में मंदिर परिसर में गोसेवा का यह प्रयास श्रद्धालुओं के लिए आस्था और सेवा दोनों का अवसर प्रदान करेगा। इससे समाज में गोसंरक्षण के प्रति सकारात्मक संदेश भी जाएगा।

विधायक सरयू राय ने कहा कि भविष्य में इस गोसेवा क्षेत्र को और विकसित करने की योजना है। यहां Nano गायों की संख्या बढ़ाने और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही मंदिर समिति और स्थानीय लोगों की मदद से इस पहल को सफल बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

सरयू राय ने बताया कि यह नैनो काउ आंध्र प्रदेश से मंदिर के बगल में रहने वाले एक सज्जन ने मंगवाया है। वह प्रेमवश हम लोगों को दिखाने के लिए मंदिर में दो नैनो काउ को लेकर आया। दोनों गायें बहुत अच्छी हैं। हम लोगों ने तय किया है कि मंदिर क्षेत्र में नैनो काउ पालेंगे। उन्होंने बताया कि अमूमन एक नैनो काउ की ऊंचाई लगभग डेढ़ फुट होती है। ये गायें एक लीटर दूध देती हैं। गौरतलब है कि आंध्रप्रदेश के पुंगनूर और केरल के वेचूर में इस नस्ल की गायें पायी जाती हैं।

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