वाशिंगटन, 20 मार्च 2026 : अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार पड़ी है। मध्य पूर्व में ईरान के साथ चल रहे युद्ध के भारी खर्चों के कारण देश का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 39 ट्रिलियन डॉलर से अधिक पहुंच गया है। वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में ही कर्ज में 2 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हमलों को समाप्त करने के लिए तय की गई समय-सीमा को लेकर वॉल स्ट्रीट और कांग्रेस में चिंता की लहर दौड़ गई है।
यह कर्ज वृद्धि मुख्य रूप से ईरान, इज़राइल और अमेरिकी सेना के संयुक्त अभियानों से जुड़े खर्चों का नतीजा है। पेंटागॉन ने पिछले सप्ताह से अब तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त बजट मांगा है, जिसमें F-35 विमानों के ईरानी गैस फील्डों पर हमले, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौसेना तैनाती और मिसाइल रक्षा प्रणालियों का खर्च शामिल है। ट्रंप ने हमलों को "90 दिनों में समाप्त" करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की जवाबी कार्रवाई से यह समय-सीमा फेल हो सकती है। फेडरल रिजर्व के पूर्व चेयरमैन ने चेतावनी दी है, "युद्ध लंबा चला तो कर्ज 50 ट्रिलियन तक पहुंच जाएगा, जो ऐतिहासिक दिवालिया का कारण बनेगा।"
कांग्रेस में डेमोक्रेट्स ने ट्रंप की आलोचना तेज कर दी है। सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा, "राष्ट्रपति युद्ध खेल रहे हैं, जबकि अमेरिकी परिवार महंगाई से जूझ रहे हैं।" रिपब्लिकन सांसद भी चुप नहीं हैं; कुछ ने ट्रंप की "त्वरित विजय" रणनीति पर सवाल उठाए हैं। ट्रेजरी सेक्रेटरी ने बयान जारी कर कहा कि चीन और जापान जैसे बड़े कर्जधारकों से बात चल रही है, लेकिन तेल संकट से बॉन्ड मार्केट में अविश्वास बढ़ा है। डॉलर की कीमत 2 प्रतिशत गिर गई, जबकि 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के पार चली गई।
युद्ध के आर्थिक प्रभाव व्यापक हैं। ईरान के कुवैत रिफाइनरी और कतर LNG प्लांट पर हमलों से तेल कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गईं। इससे अमेरिका में पेट्रोल 5 डॉलर प्रति गैलन हो गया, जो महंगाई को 7 प्रतिशत तक धकेल रहा है। ऑटोमोबाइल, एयरलाइंस और विनिर्माण क्षेत्र उत्पादन घटा रहे हैं। वॉल स्ट्रीट पर डाउ जोन्स 8 प्रतिशत लुढ़क गया, जबकि नैस्डैक में टेक शेयरों की बिकवाली हुई। IMF ने चेतावनी दी है कि यदि कर्ज 40 ट्रिलियन छू गया, तो वैश्विक वित्तीय संकट छा सकता है।
ट्रंप प्रशासन ने बचत के उपाय बताए हैं। राष्ट्रपति ने ट्वीट किया, "ईरान को हराने के बाद कर्ज चुकाएंगे। अमेरिका पहले!" लेकिन अर्थशास्त्री इसे अवास्तविक बता रहे हैं। डिफेंस बजट अब GDP का 10 प्रतिशत है, जो कोविड काल से दोगुना है। सोशल सिक्योरिटी और मेडिकेयर जैसे कार्यक्रमों पर कटौती की चर्चा शुरू हो गई है। चीन ने अमेरिकी बॉन्ड बेचने की धमकी दी, जबकि रूस ने "डॉलर का अंत" घोषित किया।
कांग्रेस ने आपात सुनवाई बुलाई है। फेड चेयर ने ब्याज दरें स्थिर रखने का संकेत दिया, लेकिन मुद्रास्फीति नियंत्रण मुश्किल है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि युद्ध समाप्ति में 6 महीने लगेंगे, तब तक कर्ज 45 ट्रिलियन हो सकता है। अमेरिकी परिवार औसतन 1 लाख डॉलर कर्ज के जाल में हैं। ट्रंप की समय-सीमा फेल होने पर राजनीतिक संकट गहरा सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह खतरे की घंटी है, जहां अमेरिकी कर्ज सभी को प्रभावित करेगा। शांति प्रयासों की सख्त जरूरत है।
