वाशिंगटन/तेहरान, 20 मार्च 2026 : मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आग तेजी से भड़क रही है। ईरान ने कुवैत की प्रमुख तेल रिफाइनरी और कतर के महत्वपूर्ण एलएनजी (Liquefied Natural Gas) प्लांट पर प्रत्यक्ष हमला कर दिया है। इस हमले से क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसके वैश्विक प्रभाव गंभीर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तत्काल प्रतिक्रिया में ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड को पूरी तरह नष्ट करने की धमकी जारी की है। साथ ही, उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता की मांग की है।
यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और एक-तिहाई एलएनजी के निर्यात का मुख्य मार्ग है। यदि यह पूरी तरह बंद हो गया, तो तेल कीमतें प्रति बैरल 150 डॉलर तक पहुंच सकती हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल देगी। ईरानी सेना ने दावा किया है कि उनके हमले अमेरिकी और इज़राइली आक्रमणों का जवाब हैं। कुवैत की रिफाइनरी में आग लगने से हजारों बैरल तेल नष्ट हो गया, जबकि कतर के प्लांट से गैस उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया। इससे यूरोप और एशिया में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।
ट्रंप प्रशासन ने पेंटागॉन को पूर्ण सतर्कता पर रहने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति ने एक बयान में कहा, "ईरान को अपनी गलती का अहसास होगा। हम उनके गैस फील्ड को तबाह कर देंगे अगर उन्होंने होर्मुज़ को बाधित किया।" अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े ने फारस की खाड़ी में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है। इज़राइल ने भी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि वह इस संघर्ष में अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने जवाब में अमेरिका को "शैतान का साथी" करार दिया और पूरे इस्लामी जगत से जिहाद का आह्वान किया।
इस संघर्ष के वैश्विक प्रभाव व्यापक हैं। स्टॉक मार्केट्स में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें 10 प्रतिशत उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में ईंधन कीमतें 20-25 रुपये प्रति लीटर बढ़ सकती हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियां उत्पादन रोकने की तैयारी कर रही हैं। यूरोपीय संघ ने आपात बैठक बुलाई है, जबकि चीन ने तटस्थ रहने का संकेत दिया है। सऊदी अरब और यूएई जैसी खाड़ी देश अपनी रक्षा मजबूत कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आज आपात सत्र बुलाया है। महासचिव ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की, लेकिन वीटो पावर वाले देशों के मतभेद से कोई ठोस प्रस्ताव पास होने की उम्मीद कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध यदि लंबा खिंचा, तो वैश्विक महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगी। अमेरिका का राष्ट्रीय ऋण पहले ही 39 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुका है, और युद्ध खर्च इसे और बढ़ाएगा।
ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को तेज करने की घोषणा की है, जिससे परमाणु युद्ध की आशंका बढ़ गई। IAEA ने चेतावनी दी है कि तेहरान के पास जल्द ही हथियार-ग्रेड यूरेनियम हो सकता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ईरानी मिसाइल हमलों की निगरानी कर रही हैं। क्षेत्र में हिजबुल्लाह और हूती विद्रोहियों की सक्रियता भी बढ़ी है।
विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप की आक्रामक नीति इस संघर्ष को समाप्त करने के बजाय विस्तार दे सकती है। पूर्व राष्ट्रपति बाइडेन समर्थकों ने ट्रंप की आलोचना की है। दुनिया शांति वार्ता की उम्मीद लगाए है, लेकिन हालात चिंताजनक हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल कदम उठाने होंगे वरना ऊर्जा संकट वैश्विक तबाही ला सकता है।
